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मन



फिर से मन चला खुद को ढूंढ़ने
ज़िन्दगी से रिश्ता निभाते निभाते
खुद से कोसो दूर हो गया था जो
लौट रहा है फिर वो अपने सपनो की गलियो में
खुद से कुछ यारियां अब तो निभाने
खुद की खुशियों में अब तो शामिल होने
बावरा मन फिर से चल पड़ा !!


-सरीता
dated - 1st August 2017


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