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इलज़ाम

 


जो मुहोब्बत का इज़हार किया 

तो इलज़ाम लगा नुमाइशगी का |

जो टूटे दिल का दर्द छिपाया 

तो इलज़ाम लगा बुज़दिली का |

जो हर हाल में इलज़ाम लगना ही है 

तो फ़रियाद कैसी और किस से |

और जो इलज़ाम ले ही लिया है 

तो क्यों ना आशिकी में ही बदनाम हो लें | 

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